success story,कभी घर में भोजन के थे लाले, आज है पांच पेट्रोल पंप की मालकिन।

आज मैं बिहार के राधिका सिंह के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज पांच पेट्रोल पंपों की मालकिन है। कभी उनके घर में खाने को भोजन नहीं थे लेकिन अपनी मेहनत और लगन के चलते आज पांच पेट्रोल पंप की मालकिन बनी है।

मार्केट में पढ़ाई का माहौल नहीं शादी के बाद पति की ₹700 मासिक की पगार पर घर चलाना। घर भी अपना नहीं किराए का। दुश्वारियां की यह आगे किसी को भी सुलझा दे लेकिन सारिका सिंह इसमें तपकर सोने कीतारा निखार उठी। जिनके घर में हैं कभी भजन की दिक्कत थे आज दर्जनों परिवार उनके माध्यम से आजीविका पा रहे हैं। आप विश्वास से लगन और सही समय पर सही निर्णय लेकर आगे बढ़ी राधिका सिंह आज पांच पेट्रोल पंप की मालकिन है।
दो बार से मुखिया चुन रहे ग्रामीण।
नेतृत्व क्षमता भी ऐसी है कि लगातार दो बार से बिहार के मुंगेर जिले की बलिया पंचायत के निवासी सारिका सिंह को मुखिया चुन रहे हैं। नवरात्र में छठे दिन पूजी जाने वाली मां कात्यायनी निर्णय और नेतृत्व क्षमता के इसी रूप का प्रतिनिधित्व करती है।
कभी पेट्रोल पंप पर काम करते थे उनके पति।
सारिका सिंह का मायका नालंदा में है। मां कहती थी की बेटियों को पढ़ा लिखा कर क्या करना है। इन्हें तो रोटियां ही बेलानी है। घर वालों से विरोध कर सारिका ने वर्ष 1993 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। अगले बार से बलिया पंचायत के सुपौल जमुआ गांव निवासी ललन सिंह से विवाह हुआ। जो पटना में पेट्रोल पंप पर ₹700 मासिक की नौकरी करते थे। तब परिवार को दो वक्त की रोटी भी ठीक से नहीं जुड़ती थी।
केरोसिन तेल की एजेंसी के निर्णय ने बदला भाग्य।
1997 में सारिका के लिए जीवन में बदलाव का अवसर आया। पटना में केरोसिन वितरक की निविदा निकाली जो महिला के लिए आरक्षित थी। सारिका ने आवेदन कर दिया। लेकिन निविदा रद्द कर दी गई। बरसे 1999 में फिर आवेदन का विज्ञापन निकाला उन्होंने आवेदन कर दिया और वर्ष 2003 में सारिका की साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। साक्षात्कार देने के अधिकांश रसूल वाले लोग आए थे और सभी कह रहे थे कि तुमने कौन सा सपना देखकर यह आवेदन किया है। लेकिन एजेंसी सारिका को मिल गई। इसके बाद पति-पत्नी ने कड़ी मेहनत की और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर मां आए का एक चौथाई हिस्सा गरीबों पर व्यय करने वाले सारिका सिंह बताती है कि निरंतर परिश्रम और माता रानी की कृपा से या संभव हो पाया है।
विकास कार्यों को गति जिला मुखिया संघ की बनी अध्यक्ष।
वर्ष 2016 में मुंगेर जिले की बलिया पंचायत का मुखिया पद महिला के लिए आरक्षित हो गया। सारिका ने चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत कर पंचायत के विकास को गतीदी। शिक्षा और सुविधाओं पर ध्यान दिया तो वर्ष 2021 में फिर मुखिया बनी। अब वह मुंगेर जिला मुखिया संघ की अध्यक्ष भी है।

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