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बिहार सरकार की गंगा जल योजना क्या है? इस योजना की शुरुआत कब हुई है?

बिहार सरकार की योजनाओं में यह योजना प्रमुख योजना है। बरसात के समय में बिहार के कुछ जिले बाढ़ से पीड़ित हो जाता है । जिससे जान माल का खतरा बढ़ जाता है। कुछ जिलों में सूखा का सामना करना पड़ता है जिससे पीने की पानी का भी दिक्कत हो जाता है। इस योजना का न्यू 27 नवंबर 2022 को रखी गई। इस योजना के माध्यम से बाढ़ और सूखे दोनों समस्याओं का समाधान होगा।
बिहार सरकार इसी समस्याओं के समाधान के लिए इस योजना का शुरूआत किया है। बरसात में के समय में पानी को एकत्रित कर पीने योग्य बनाई जाएगी। गंगा नदी में अतिरिक्त पानी का संचालन होगा जिससे बाद की समस्या का भी हल हो जाएगा। वर्तमान में यह योजना नालंदा के राजगीर तथा बोधगया तक सीमित रहेगा। यह योजना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वकांक्षी योजनाओं में एक होगा। यह योजना जल जीवन हरियाली मिशन का एक भाग होगा।
यह योजना किस तरह काम करेगा।
लिफ्ट स्टोर टेम ट्रीट सप्लाई कि आधार पर काम करेगा। हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्राट्रक्चर लिमिटेड 2019 से इस योजना पर काम कर रही है। भंडारण जलाशयों में संचारित करने हेतु पटना के हाथी दो जगह में इन जलाशयों को बनाया जाएगा। यह भंडारण जाला से राजगीर उत्तर तथा बोधगया में स्थित होगा।
इस योजना की क्यों आवश्यकता है।
नालंदा जिला के राजगीर के आसपास का क्षेत्र चट्टानी और पानी की कमी वाला क्षेत्र है। यहां पर भूमिगत जल का अंधाधुन गलत उपयोग होता है। जिसका राम पीने की पानी का काफी दिक्कत होता है। इन जगहों पर सूखे का सामना भी करना पड़ता है। राजगीर और बोधगया धार्मिक और पर्यटन स्थल की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसीलिए ऐसी जगह पर पानी की एक विश्वसनीय स्रोत का होना जरूरी है।
इस योजना के लाभ।
गंगा नदी के बाद के संकट को कम करने की यह योजना बहुत लाभकारी होगा। सरकार के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को 135 लीटर पेयजल प्रतिदिन दिया जाएगा। भूजल के उपयोग में कमी आने से जल स्तर नीचे जाने से रोका जा सकता है।
इस योजना का क्या प्रभाव होगा।
बाढ़ के कारण जानमाल का नुकसान होता है उसमें कमी आएगी। जिन जगहों में जल संकट से लोग जूझ रहे हैं उस जगह का विकास होगा। बाढ़ और सूखे की समस्याओं का निदान होने से वहां की विकास होना जरूरी है। उस जगह की अन्य उत्पाद कार्यों में भी विकास होगा।

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